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Saturday, 16 November 2024

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था 
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था 
मैं उस को देखने को तरसती ही रह गई 
जिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब था 
बस्ती के सारे लोग ही आतिश-परस्त थे 
घर जल रहा था और समुंदर क़रीब था 
मरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून को 
हर शख़्स के गले में निशान-ए-सलीब था 
दफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र में 
मैं जिस को चाहती थी वो लड़का ग़रीब था 

Friday, 25 October 2024

अच्छी थी पगडंडी अपनी, सड़कों पर तो जाम बहुत है

अच्छी थी पगडंडी अपनी, सड़कों पर तो जाम बहुत है।
फुर्र हो गई फुर्सत अब तो, सबके पास काम बहुत है।
नहीं जरूरत बूढ़ों की अब, हर बच्चा बुद्धिमान बहुत है।
उजड़ गए सब बाग बगीचे, दो गमलों में शान बहुत है।
मट्ठा-दही नहीं खाते हैं, कहते हैं ज़ुकाम बहुत है।
पीते हैं जब चाय तब कहीं, कहते हैं आराम बहुत है।
बंद हो गई चिट्ठी और पत्री, फोनों पर पैगाम बहुत है।
आदी हैं ए.सी. के इतने, कहते बाहर गर्मी बहुत है।
झुके-झुके स्कूली बच्चें, बस्तों में सामान बहुत है।
बचे है थोड़े से रिश्तेदार, अकड़ का एहसास बहुत है।
सुविधाओं का ढेर लगा है, पर इंसान परेशान बहुत है।।
अच्छी थी पगडंडी अपनी, सड़कों पर तो जाम बहुत है।
फुर्र हो गई फुर्सत अब तो, सबके पास काम बहुत है।

Sunday, 13 October 2024

प्यार नज़रो में आना नही चाहिए,

प्यार नज़रो में आना नही चाहिए,
रोज़ मिलना मिलाना नही चाहिए।

लोग पागल समझने लगेंगे तुम्हे,
रात दिन मुस्कुराना नही चाहिए।

बारिशों के इरादे खतरनाख है,
अब पतंगे उड़ाना नहीं चाहिए।

मेने ये सोच कर दे दिया दिल उसे,
दिल किसीका दुखाना नहीं चाहिए।

एक कमले में अंजुम कटे जिंदगी,
हर जगह गुल खिलाना नहीं चाहिए।

रोज़ मिलना मिलाना नहीं चाहिए।।

- अंजुम रहबर 

Monday, 30 September 2024

कैसे कैसे स्वाँग रचाए हम ने दुनिया-दारी में यूँ ही सारी उमर गँवा दी औरों ग़म-ख़्वारी में

हम भी कितने सादा-दिल थे सीधी सच्ची बात करें लोगों ने क्या क्या कह डाला लहजों की तह-दारी में

जब दुनिया पर बस न चले तो अंदर अंदर कुढ़ना क्या कुछ बेले के फूल खिलाएँ आँगन की फुलवारी में

आने वाले कल की ख़ातिर हर हर पल कुर्बान किया हाल को दफ़ना देते हैं हम जीने की तय्यारी में

अब की बार जो घर जाना तो सारे एल्बम ले आना वक़्त की दीमक लग जाती है यादों की अलमारी में

Saturday, 21 September 2024

बसीर बद्र

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता,
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नही रहता
बड़े लोगो से मिलने में हमेशा फासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नही रहता


बसीर बद्र 

Saturday, 25 May 2024

लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार तुम्हारा है, 

तुम झुठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है, 

इस दौर के फरियादी जायें तो कहा जायें, 

कानून तुम्हारा है, दरबार तुम्हारा है, 

सूरज की तपन तुमसे बर्दास्त नही होती, 

एक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है, 

वैसे तो हर एक शह में जलवे हैं तुम्हारे ही, 

दुश्वार बहुत लेकिन दीदार तुम्हारा है, 

Monday, 11 March 2024

चलना ज़मीन पर अभी आया नहीं मुझे

ऐसा नहीं कि उस ने बनाया नहीं मुझे
जो ज़ख़्म उस को आया है आया नहीं मुझे

दीवार को गिरा के उठाया भी मैं ने था
दीवार ने गिरा के उठाया नहीं मुझे

मैं ख़ुद भी आ रहा था जगह ढूँडते हुए
याँ तक ये इंहिदाम ही लाया नहीं मुझे

मेरा ये काम और कसी के सुपुर्द है
ख़ुद ख़्वाब देखना अभी आया नहीं मुझे

कल नींद में चराग़ को नाराज़ कर दिया
सूरज ने आज सुब्ह जगाया नहीं मुझे

ज़ंजीर लाज़मी है कि ज़ंजीर के बग़ैर
चलना ज़मीन पर अभी आया नहीं मुझे